1.5°C सीमा का टूटना ‘अपरिहार्य’: अब लक्ष्य नुकसान को सीमित करना

जलवायु परिवर्तन के विरुद्ध वैश्विक प्रयासों के सामने अब एक नया और अधिक कठिन प्रश्न खड़ा हो गया है — क्या दुनिया 1.5°C की सीमा को बचा पाएगी, या अब प्राथमिकता इस सीमा के उल्लंघन से होने वाले नुकसान को सीमित करने की होनी चाहिए? 3 सितंबर 2026 की रिपोर्ट में UNEP के आकलन के […]

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NALSAR विवाद: नियामकीय शक्ति की सीमा और छात्रों के अधिकार

किसी लोकतांत्रिक व्यवस्था में पेशेवर संस्थाओं को नियमन की शक्ति इसलिए दी जाती है ताकि वे अपने क्षेत्र में मानकों, अनुशासन और व्यावसायिक नैतिकता को बनाए रख सकें। लेकिन जब यही नियामकीय शक्ति किसी व्यक्ति या समूह के अधिकारों को प्रभावित करने लगे, तब उसके वैधानिक आधार और संवैधानिक सीमाओं पर प्रश्न उठना स्वाभाविक है।

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गंगा के बाढ़ क्षेत्र में निर्माण: विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन की चुनौती

गंगा केवल भारत की प्रमुख नदी नहीं, बल्कि देश की सभ्यता, कृषि, अर्थव्यवस्था और पारिस्थितिकी की जीवनरेखा है। इसलिए इसके बाढ़ क्षेत्र में निर्माण का प्रश्न केवल भूमि-उपयोग का विषय नहीं, बल्कि आपदा प्रबंधन, पर्यावरण संरक्षण, नदी पारिस्थितिकी और सतत विकास से जुड़ा हुआ है। 10 अगस्त 2026 को राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन (NMCG) की

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बच्चों के लिए सोशल मीडिया प्रतिबंध: ‘शील्ड बिल’ से सुरक्षा और डिजिटल स्वतंत्रता के बीच संतुलन की चुनौती

डिजिटल युग में इंटरनेट बच्चों की शिक्षा, मनोरंजन और सामाजिक संवाद का महत्वपूर्ण माध्यम बन चुका है। लेकिन यही डिजिटल दुनिया साइबर बुलिंग, अनुचित सामग्री, ऑनलाइन शोषण, निजता के उल्लंघन और सोशल मीडिया की लत जैसी चुनौतियाँ भी पैदा कर रही है। इसी संदर्भ में बच्चों के सोशल मीडिया उपयोग को नियंत्रित करने वाला ‘शील्ड

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वेटलैंड के आसपास खनन पर सुप्रीम कोर्ट का स्पष्टीकरण: विकास और पारिस्थितिकी तंत्र के बीच संतुलन की नई कसौटी

भारत में तेजी से बढ़ती खनन गतिविधियाँ आर्थिक विकास, रोजगार और बुनियादी ढाँचे के लिए आवश्यक हैं। लेकिन इनका विस्तार यदि पारिस्थितिक रूप से संवेदनशील क्षेत्रों तक हो जाए तो जल, जैव-विविधता और स्थानीय आजीविका पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है। इसी संदर्भ में सुप्रीम कोर्ट का वेटलैंड कंजर्वेशन रिजर्व के आसपास खनन को लेकर

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SC/ST आरक्षण में ‘क्रीमी लेयर’: क्या वास्तविक समानता की राह यही है?

सामाजिक न्याय की अवधारणा जितनी सरल दिखाई देती है, व्यवहार में उतनी ही जटिल है। हाल ही में केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) आरक्षण से ‘क्रीमी लेयर’ को बाहर रखने की मांग वाली याचिकाओं का विरोध किया है। यह याचिकाएं अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) आरक्षण की तर्ज

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सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यय बढ़ाने की चुनौती: क्या भारत तैयार है ?

सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यय बढ़ाने की चुनौती: भारत के लिए एक गंभीर परीक्षा स्वास्थ्य किसी भी राष्ट्र के मानव पूंजी निर्माण की बुनियाद है, फिर भी विश्व भर में — विशेषकर निम्न व मध्यम आय वाले देशों (LMICs) में — सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यय लगातार दबाव में है। विश्व बैंक के हालिया आकलन बताते हैं कि इन

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