Social Justice

NALSAR विवाद: नियामकीय शक्ति की सीमा और छात्रों के अधिकार

किसी लोकतांत्रिक व्यवस्था में पेशेवर संस्थाओं को नियमन की शक्ति इसलिए दी जाती है ताकि वे अपने क्षेत्र में मानकों, अनुशासन और व्यावसायिक नैतिकता को बनाए रख सकें। लेकिन जब यही नियामकीय शक्ति किसी व्यक्ति या समूह के अधिकारों को प्रभावित करने लगे, तब उसके वैधानिक आधार और संवैधानिक सीमाओं पर प्रश्न उठना स्वाभाविक है। […]

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वेटलैंड के आसपास खनन पर सुप्रीम कोर्ट का स्पष्टीकरण: विकास और पारिस्थितिकी तंत्र के बीच संतुलन की नई कसौटी

भारत में तेजी से बढ़ती खनन गतिविधियाँ आर्थिक विकास, रोजगार और बुनियादी ढाँचे के लिए आवश्यक हैं। लेकिन इनका विस्तार यदि पारिस्थितिक रूप से संवेदनशील क्षेत्रों तक हो जाए तो जल, जैव-विविधता और स्थानीय आजीविका पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है। इसी संदर्भ में सुप्रीम कोर्ट का वेटलैंड कंजर्वेशन रिजर्व के आसपास खनन को लेकर

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SC/ST आरक्षण में ‘क्रीमी लेयर’: क्या वास्तविक समानता की राह यही है?

सामाजिक न्याय की अवधारणा जितनी सरल दिखाई देती है, व्यवहार में उतनी ही जटिल है। हाल ही में केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) आरक्षण से ‘क्रीमी लेयर’ को बाहर रखने की मांग वाली याचिकाओं का विरोध किया है। यह याचिकाएं अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) आरक्षण की तर्ज

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